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बस्ती- उत्तर प्रदेश सरकार की अपराध मुक्त नीति पर उठे सवाल, नामजद आरोपी अब भी खुलेआम घूम रहे

बस्ती- जनपद बस्ती में युवक की संदिग्ध मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। थाना हर्रैया क्षेत्र के ग्राम शंभूपुर निवासी जुगराज निषाद ने पुलिस अधीक्षक बस्ती को प्रार्थना पत्र देकर मृतक निर्मल निषाद की मौत को संदिग्ध बताते हुए नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि मृतक को लंबे समय से मानसिक एवं शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। मृतक द्वारा मौत से पहले लिखे गए सुसाइड नोट, वीडियो, फोटो और व्हाट्सएप चैटिंग को परिवार ने महत्वपूर्ण साक्ष्य बताया है। परिजनों का कहना है कि मृतक ने अपने लिखित बयान और वीडियो में कुछ लोगों को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया था तथा लगातार धमकी और मारपीट की बात कही थी।
घटना को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। परिजनों के अनुसार शव मिलने के समय मृतक के पैरों में चप्पल थी, जींस फटी हुई थी और शरीर पर चोट के निशान मौजूद थे, जिससे मामला और संदिग्ध हो गया है। परिवार का आरोप है कि एक महिला आरोपी की गिरफ्तारी के बाद भी अन्य नामजद आरोपी अब तक खुलेआम घूम रहे हैं और लगातार धमकियां दे रहे हैं।
इसी को लेकर अब उत्तर प्रदेश सरकार की “अपराध मुक्त नीति” पर भी सवाल उठने लगे हैं। पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सुसाइड नोट, वीडियो और चैटिंग जैसे अहम साक्ष्य मौजूद हैं, तो फिर नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी अब तक क्यों नहीं हुई? आखिर किसके संरक्षण में आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं?
परिवार का कहना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से पूरे परिवार में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। पीड़ित जुगराज निषाद ने मांग की है कि एफआईआर संख्या 107/2026 में नामजद सभी आरोपियों के खिलाफ निष्पक्ष विवेचना कर जल्द गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।
मामले की शिकायत मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, डीआईजी रेंज बस्ती एवं अन्य उच्चाधिकारियों को भी भेजी गई है। अब देखना होगा कि पुलिस प्रशासन इस गंभीर मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करता है।

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