October 14, 2026
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लखनऊ/उत्तर प्रदेश। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने अपनी इच्छा से विराम देते हुए त्यागपत्र दे दिया है। अपने विदाई संदेश में उन्होंने अपनी पूरी प्रशासनिक यात्रा, संघर्ष, सीख और आमजन से मिले प्यार को बेहद भावुक शब्दों में याद किया।

दिव्या मित्तल ने बताया कि साधारण परिवेश में पली-बढ़ी होने के बावजूद उन्होंने एक सफल जीवन का सपना देखा। दिन-रात मेहनत कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्हें लंदन में नौकरी मिली। हालांकि विदेश में सफलता हासिल करने के बावजूद उन्हें अपने देश से दूर रहने का खालीपन महसूस होता रहा।

उन्होंने कहा कि उनकी शिक्षा, आत्मविश्वास और दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताकत इसी देश की मिट्टी का कर्ज है। इसी कर्ज को चुकाने की भावना से वह भारत लौटीं और IAS अधिकारी बनने का अवसर मिला।

अपने प्रशासनिक अनुभव को याद करते हुए उन्होंने कहा कि देवरिया ने उन्हें सही के साथ खड़े रहना सिखाया, जबकि मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बल्कि केवल एक राय है। मां विंध्यवासिनी के चरणों में उन्होंने यह भी सीखा कि असली शक्ति किसी पद से नहीं, बल्कि ईश्वर की कृपा और लोगों के विश्वास से आती है।

दिव्या मित्तल ने कहा कि सरकारी सेवा के दौरान सबसे बड़ी सीख यह मिली कि अपने लिए देखे गए सपने पूरे हो जाने के बाद अपने लोगों के सपनों को जीना ही जीवन का असली उद्देश्य है। जिस परिवार को पहली बार जमीन का अधिकार मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर मिला और जिस किसान के खेत तक पानी पहुंचा—उनकी खुशी में उन्हें सेवा का वास्तविक सुकून मिला।

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उन्होंने अपने सहकर्मियों, अधिकारियों और कर्मचारियों का भी आभार जताया, जिन्होंने उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया।

अपने संदेश के अंत में दिव्या मित्तल ने लहुरिया दह की पहाड़ी की एक वृद्ध महिला का भावुक प्रसंग साझा किया। उन्होंने बताया कि जब उस महिला के गांव में पहली बार पानी पहुंचा तो वह कुछ नहीं बोली, बल्कि कांपते हाथों से उनका सिर छूकर आशीर्वाद दे गई।

दिव्या मित्तल ने लिखा कि पद आज छूट गया है, लेकिन उस वृद्ध मां का स्पर्श जीवन भर नहीं छूटेगा और देश की मिट्टी से मिला वह सपना भी कभी नहीं छूटेगा।

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बलराम
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