October 14, 2026
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बस्ती- विगत 30 वर्षों से समाज के समय विकास, मानवीय मूल्यों के संवर्धन तथा जन-जागरुकता के क्षेत्र में सतत एवं समर्पित रूप से कार्यरत जलांचल प्रगति पथ संस्थान शिक्षा, नशामुक्ति, युवा सशक्तिकरण, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय, सामुदायिक विकास तथा जनकल्याण के विविध क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देता रहा है। संस्था का दृढ विश्वास है कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक उन्नति केवल आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि शिक्षित नागरिकों, जागरूक युवाओं, सशक्त महिलाओं तथा उत्तरदायी समाज के निर्माण से सुनिश्चित होती है। विगत 30 वर्षों की सामाजिक यात्रा में संस्थान ने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचकर कार्य करने को अपनी प्राथमिकता बनाया है। ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में शिक्षा के प्रसार, नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता, महिला अधिकारी, युवा नेतृत्व विकास, सामाजिक समरसता तथा जनहित से जुड़े मुद्दों पर संस्था निरंतर अभियान, कार्यशालाएं, संगोष्ठियां एवं जनसंपर्क कार्यक्रम संचालित करती रही है। उत्तर प्रदेश के लगभग सभी जनपदों सहित विभिन्न क्षेत्रों में संस्था की सक्रिय भागीदारी समाज के प्रति उसकी गहरी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। संस्थान ने विशेष रूप से युवाओं को राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ने, उनमें नेतृत्व क्षमता विकसित करने, सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना जागृत करने तथा सकारात्मक जीवन मूल्यों को प्रोत्साहित करने के लिए अनेक कार्यक्रम संचालित किए हैं। संस्था का मानना है कि युवा शक्ति किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी होती है और यदि उसे सही दिशा, अवसर एवं मार्गदर्शन प्राप्त हो तो वह समाज में व्यापक सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है। वर्तमान समय में मानव सभ्यता एक ऐसे दौर से गुजर रही है जहां विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है। जलस्रोतों का निरंतर क्षरण, भूजल स्तर में गिरावट, मृदा की उर्वरता में कमी, बढ़ता प्रदूषण, जैव विविधता का संकट तथा वृक्षों की अंधाधुंध कटाई आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए गंभीर चुनौती बनकर उभरे हैं। यह केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व और सतत विकास का प्रश्न है। इन्हीं परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए जलांचल प्रगति पथ संस्थान ने अपने सामाजिक अभियानों का विस्तार करते हुए पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन, मृदा संरक्षण, वृक्षारोपण तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने का संकल्प लिया है। संस्था का मानना है कि जल, जंगल, जमीन और जैव विविधता केवल प्राकृतिक संपदा नहीं हैं, बल्कि मानव जीवन और सभ्यता के आधार स्तंभ हैं। इनके संरक्षण के बिना सतत विकास की कल्पना संभव नहीं है। इसी उद्देश्य से संस्था ‌द्वारा जन-जागरुकता रैलियों, वृक्षारोपण अभियानों, जल संरक्षण कार्यक्रमों, पर्यावरणीय संवादौ तथा सामुदायिक सहभागिता आधारित गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल जागरुकता फैलाना नहीं, बल्कि समाज में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और सहभागिता की आवना विकसित करना है। संस्थान का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी, विभागों या संगठनों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक, सामाजिक और राष्ट्रीय दायित्व है। यदि प्रत्येक व्यक्ति जल संरक्षण, वृक्षारोपण, स्वच्छता, मृदा संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग का संकल्प ले, तो एक स्वस्थ, संतुलित और समृद्ध भविष्य का निर्माण किया जा सकता है। जलांचल प्रगति पथ संस्थान समाज के सभी वर्गों, युवाओं, महिलाओं, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों एवं जनप्रतिनिधियों से इस अभियान में सहभागी बनने का आहवान करता है। संस्था भविष्य में भी शिक्षा, नशामुक्ति, युवा सशक्तिकरण, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक जागरुकता और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्रों में जनभागीदारी को बढ़ावा देते हुए राष्ट्र निर्माण तथा सतत विकास के अपने संकल्प को और अधिक मजबूती के साथ आगे बढ़ाती रहेगी।

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संस्था का संदेश – “शिक्षित समाज, जागरुक युवा, नशामुक्त पीढ़ी, सशक्त नारी और सुरक्षित पर्यावरण यही समृद्ध, आत्मनिर्भर, विकसित और संवेदनशील भारत की सुदृढ़ आधारशिला है।”

“जल बचाएं, वृक्ष लगाएं, मृदा को संरक्षित करें और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन अपनाएं यही आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी

सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।”

बैठक में उपस्थित प्रमुख पदाधिकारी एवं सदस्य

जलांचल प्रगति पथ संस्थान द्वारा समाज उत्थान, जन-जागरुकता एवं पर्यावरण संरक्षण संबंधी भावी कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करने हेतु आयोजित बैठक में संस्था के जिला अध्यक्ष श्री विनोद निषाद, राष्ट्रीय महासचिव श्री राममूर्ति निषाद, राष्ट्रीय कार्यालय प्रभारी श्री उज्ज्वल राज निषाद, ग्राम प्रधान श्री बबलू निषाद सहित श्री रामनरेश निषाद, श्री दयाराम निषाद, श्री संदीप निषाद, श्री राजन निषाद, श्री अवधेश निषाद, श्री अजय प्रताप निषाद, श्री बलराम निषाद, श्री रमेश चंद्र निषाद, श्री राम नवन निषाद, श्री राम बदन निषाद, श्री सुखदेव निषाद, श्रीमती माधुरी निषाद, श्री रामपाल निषाद, श्री दिलीप निषाद, श्री पृथ्वीराज चौहान, डॉ. वीरेन्द्र जायसवाल, श्री इन्द्रेश निषाद, श्री अंगद निषाद तथा श्री वीरेन्द्र निषाद उपस्थित रहे।

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