गोंडा : 7 वर्षीय अर्पित की दर्दनाक कहानी ने झकझोर दिया दिल
गोंडा में 7 वर्षीय मासूम अर्पित की बेबसी और मजबूरी की मार्मिक कहानी सामने आई है। अर्पित अपनी मां के साथ लुधियाना से आया था, लेकिन बस अड्डे पर मां की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। चार दिन तक इलाज चलने के बाद उनकी मृत्यु हो गई।
मासूम अर्पित ने अपने रिश्तेदारों को सूचना दी, लेकिन न ससुराल पक्ष से और न ही मायके पक्ष से कोई अंतिम समय में साथ देने पहुंचा। मां की मौत के बाद अर्पित अपनों के इंतजार में आस भरी निगाहों से देखता रहा, लेकिन कोई नहीं आया।
मेडिकल कॉलेज के अनुरोध पर एक सामाजिक संगठन ने महिला का अंतिम संस्कार कराया। बताया जाता है कि अर्पित के माता-पिता दो वर्ष पहले अलग हो चुके थे और पिता ने दूसरी शादी कर ली थी।
इस संवेदनशील मामले में जिलाधिकारी की पहल सराहनीय रही। उन्होंने मासूम अर्पित की पढ़ाई-लिखाई और पालन-पोषण की जिम्मेदारी लेने का आश्वासन दिया। अंतिम संस्कार के बाद बच्चे को बाल शिशु गृह भेज दिया गया।
अर्पित की यह कहानी समाज के सामने रिश्तों की संवेदनहीनता और मानवता के महत्व को उजागर करती है।
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