लेख- बलराम निषाद
पर्यावरण मानव जीवन का आधार है। स्वच्छ वायु, शुद्ध जल, उपजाऊ भूमि और हरियाली के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। लेकिन बढ़ते प्रदूषण, अंधाधुंध पेड़ों की कटाई और प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन ने पर्यावरण के संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। आज जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और जैव विविधता का संकट पूरी दुनिया के सामने बड़ी चुनौती बनकर खड़ा है। विश्व पर्यावरण दिवस हर वर्ष 5 जून को इसी जागरूकता और संरक्षण के संदेश के साथ मनाया जाता है।
पर्यावरण की रक्षा केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक कर्तव्य है। यदि हम अपने जीवन में छोटे-छोटे बदलाव करें, जैसे अधिक से अधिक पेड़ लगाना, प्लास्टिक का उपयोग कम करना, जल संरक्षण करना और स्वच्छता बनाए रखना, तो पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
आज आवश्यकता है कि हम विकास और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करें। आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण देने के लिए हमें अभी से ठोस कदम उठाने होंगे। पर्यावरण की सुरक्षा ही मानवता की सुरक्षा है। यदि प्रकृति सुरक्षित रहेगी, तभी हमारा भविष्य भी सुरक्षित रहेगा।
विश्व पर्यावरण दिवस हमें यह संदेश देता है कि पृथ्वी केवल हमारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की भी धरोहर है। इसलिए आइए संकल्प लें कि हम पर्यावरण संरक्षण को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएंगे और एक हरित, स्वच्छ तथा स्वस्थ भारत के निर्माण में अपना योगदान देंगे।
– बलराम निषाद
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